राज्यसभा की शतरंज: कहीं जीत तय, कहीं वोटों का गणित बिगाड़ सकता है खेल

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

दिल्ली की राजनीति में असली लड़ाई कई बार लोकसभा में नहीं बल्कि राज्यसभा की सीटों पर तय होती है। इस बार भी वही तस्वीर बन रही है। 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होना है, लेकिन असली टकराव सिर्फ तीन राज्यों में दिखाई दे रहा है बिहार, ओडिशा और हरियाणा। बाकी जगहों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन जहां मुकाबला है वहां वोटों का गणित किसी भी वक्त पलट सकता है।

10 राज्यों में चुनाव, लेकिन असली लड़ाई सिर्फ तीन जगह

देश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होना है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।

वास्तविक मतदान की स्थिति केवल तीन राज्यों में बन रही है:

  1. बिहार – 5 सीटें
  2. ओडिशा – 4 सीटें
  3. हरियाणा – 2 सीटें

इन राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

ओडिशा में भाजपा ने बढ़ाई बीजद की मुश्किल

ओडिशा में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। राज्य में चार सीटों के लिए चुनाव हो रहा है और यहां भाजपा ने सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (BJD) के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक समीकरण बताते हैं- भाजपा दो सीटें जीत सकती है। बीजद एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन चौथी सीट पर असली ड्रामा है।

इस सीट पर मुकाबला माना जा रहा है- भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे। बीजद उम्मीदवार दत्तेश्वर होता। जीत के लिए 30 वोटों की जरूरत है। भाजपा के पास अपने विधायकों के अलावा निर्दलीयों का भी समर्थन है, लेकिन तीसरी सीट के लिए अभी भी अतिरिक्त वोटों की तलाश जारी है।

दूसरी ओर बीजद कांग्रेस और वामदलों के समर्थन पर नजर लगाए बैठा है।

बिहार में नीतीश कुमार की एंट्री से मुकाबला गर्म

बिहार का राज्यसभा चुनाव इस बार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद मैदान में हैं।

राज्य में पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार खड़े हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

विधानसभा के आंकड़ों के मुताबिक- एनडीए के पास 202 विधायक। जीत के लिए 41 वोट जरूरी। इस गणित के हिसाब से भाजपा और जदयू के दो-दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

लेकिन एक सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है।

यहां टक्कर मानी जा रही है- एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा, राजद के अमरेंद्र धारी सिंह। इस सीट के नतीजे में बसपा और एआईएमआईएम के विधायक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

हरियाणा में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर

हरियाणा की राजनीति में भी राज्यसभा चुनाव ने हलचल बढ़ा दी है। यहां दो सीटों के लिए मुकाबला है और भाजपा ने कांग्रेस को सीधी चुनौती दी है। उम्मीदवार हैं भाजपा – संजय भाटिया, कांग्रेस – कर्मवीर बौद्ध। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल मैदान में उतर गए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति हो सकता है।

हरियाणा विधानसभा में- कांग्रेस के पास 37 विधायक, जीत के लिए 31 वोट जरूरी। लेकिन पार्टी को क्रॉस वोटिंग का खतरा सताता रहा है। अगर ऐसा हुआ तो 2016 और 2022 की तरह कांग्रेस को फिर बड़ा झटका लग सकता है।

राज्यसभा की राजनीति: जहां एक वोट बदल देता है खेल

राज्यसभा चुनाव अक्सर शांत दिखते हैं, लेकिन असली सियासी खेल यहीं होता है। कई बार एक-दो वोट पूरे समीकरण बदल देते हैं।

इस बार भी तस्वीर साफ है कुछ सीटें तय, कुछ सीटें फिक्स लेकिन कुछ सीटों पर आखिरी पल तक सस्पेंस और भारतीय राजनीति में यही सस्पेंस सबसे बड़ा ड्रामा बन जाता है।

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